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यूपी निकाय चुनाव: विपक्षियों ने EVM पर उठाए सवाल तो बैलेट पेपर पर कौन जीता?

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उत्तर प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव खत्म होने के बाद जैसे ही उसका परिणाम सामने आया विपक्षी पार्टियों के खेमे में एक बार फिर मायूसी छा गई. इन चुनावों में बीजेपी ने एक बड़े अंतर से जीत हासिल किया है. हालांकि इस परिणाम के बाहर आते ही विपक्षी पार्टियों ने एक बार फिर ईवीएम पर सवाल खड़े किए. इसकी शुरुआत समाजवादी पार्टी ने की.

समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने तो शुक्रवार को मतगणना के दौरान ही बयान दे डाला कि ईवीएम से बीजेपी जीतेगी लेकिन नगर पंचायतों और नगर पालिकाओं में उसकी हार होगी. लेकिन जब परिणाम सामने आए तो नरेश अग्रवाल का दावा फीका पड़ता नजर आया.

नगरीय निकाय में बड़ी जीत के जश्न को मनाकर शनिवार को आराम कर रही यूपी बीजेपी पर विपक्षी पार्टियों ने जोरदार हमले किए. बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को लखनऊ में कहा कि ईवीएम के कारण ही बीजेपी की नगर निगमों में जीत हुई है. अगर बीजेपी ये दावा करती है कि लोग उनके साथ हैं तो वो 2019 का चुनाव बैलेट पेपर पर करके दिखाएं.

वहीं कोलकाता में समाजवादी पार्टी के राज्य अधिवेशन में पहुंचे समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी कहा कि बैलेट पेपर पर पार्टी केवल 15 प्रतिशत वोट हासिल कर सकी है.
विपक्षी पार्टियों के तमाम आरोपों के बीच नगरीय निकाय के ये परिणाम बताते हैं कि ईवीएम से हुए महापौर के 16 पदों के चुनाव में 14 पर बीजेपी की जीत हुई. वहीं ईवीएम से ही हुए 1300 पार्षदों के चुनाव में 596 पर बीजेपी का कमल खिला है.

बैलेट पेपर से हुए चुनाव पर नजर डालें तो पता चलता है कि नगर पालिका अध्यक्ष के 198 में 70 पदों पर बीजेपी जीती है तो नगर पालिका सदस्य के 5261 निकायों में 922 पर बीजेपी को सफलता मिली है. वहीं नगर पंचायत अध्यक्ष के 438 पदों में 100 पर बीजेपी का कब्जा हुआ है तो नगर पंचायत सदस्यों के 5434 निकायों में केवल 664 पर बीजेपी जीती है.

आंकड़ों से भले ही लगता है कि बैलेट पेपर पर पार्टी को बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली लेकिन अगर आंकड़ों को ही ध्यान से देखें तो पता चलता है कि विपक्ष के दावे में भी बहुत अधिक दम नहीं है.

बैलेट पेपर से हुए नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव में बीजेपी की 70 सीटों पर जीत के बाद सबसे ज्यादा अध्यक्ष समाजवादी पार्टी के हैं. समाजवादी पार्टी ने नगर पालिका के 45 अध्यक्ष पद जीते हैं लेकिन समाजवादी पार्टी के बाद तीसरे नंबर पर कोई पार्टी ना होकर निर्दलीय हैं. सूबे में 43 निर्दलीयों ने नगर पालिका अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की है यानि किसी भी पार्टी को ये जीत नहीं जानी चाहिए.

ठीक इसी तरह नगर पालिका सदस्यों के 5261 पदों में से सबसे ज्यादा जीत निर्दलीयों की है. निर्दलीयों ने 3380 नगर पालिका सदस्य पद पर जीत हासिल की है, जिसे किसी भी पार्टी के खाते में नहीं गिना जा सकता. अगर नगर पंचायत अध्यक्ष पद की बात करें तो 438 में से निर्दलीयों ने 182 पद जीते जो कि सबसे ज्यादा है तो वहीं नगर पंचायत सदस्य पद में 5434 पदों में से 3875 पर निर्दलीयों की जीत हुई.

आंकड़े बता रहे हैं कि जिन जगहों पर बीजेपी की हार बताई जा रही है वहां जीत विपक्ष की भी नहीं हुई है. निर्दलीयों की जीत का मतलब है कि लोगों ने किसी भी पार्टी को नहीं चुना है. ऐसे में विपक्ष का ये कहना कि बैलेट पेपर पर बीजेपी की हार हुई है, काफी हद तक गलत है. निर्दलीयों की जीत में केवल बीजेपी की नहीं बल्कि सभी पार्टियों की हार हुई है.

वैसे अगर केवल पार्टीगत आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पालिका सदस्य, नगर पंचायत अध्यक्ष और नगर पंचायत सदस्य के पदों पर सबसे ज्यादा सीटें बीजेपी के ही पास है. इसके बाद नगर निगमों में अच्छा प्रदर्शन ना कर पाने वाली समाजवादी पार्टी का नंबर आता है. ऐसे में अगर बैलेट पेपर में कोई हीरो है तो वो निर्दलीय हैं.

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