दो माह से नहीं मिला राशन, कंद-मूल खाने पर मजबूर है आदिम जनजाति
झारखंड सरकार आदिम जनजाति के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर इनके उत्थान के लिए कई योजनाएं बनाने का दावा करती है, लेकिन जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण लातेहार जिले में आदिम जनजाति को दो माह से सरकारी राशन नहीं मिल रहा है.
मामला लातेहार जिले के हेरगंज प्रखंड के खीराखाड़ गांव का है. दो माह से राशन न मिलने के कारण गांव वाले जंगली कंदमूल खा कर जीवन गुजार रहे हैं. गांव में शिक्षा व्यवस्था की हालत काफी दयनीय है. सरकारी स्कूल के नाम पर एक स्कूल है, लेकिन इसका ताला भी स्कूल के शिक्षक की मर्जी से ही खुलता है.
गांव में पेयजल भी काफी बड़ी समस्या है. गांव वालों को नदियों के चुवाड़ी से पानी लाना पड़ता है. गांव के लोगों ने बताया कि गांव वालों को किसी भी सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिलता है,
प्रशासन की लापरवाही से नाराज होकर ग्रामीणों ने गांव छोड़ दिया था. जिस पर जिला प्रसासन ने को सभी बुनियादी सुविधाएं देने का आश्वासन दिया था, मगर आज तक कुछ नहीं हुआ. ग्रामीणों ने कहा कि हमने जिला प्रशासन के कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो पाई है.
ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी अधिकारी कहते हैं कि तुम्हारे गांव तक गांड़ी से आने का रस्ता नहीं है. पहले राश्ता ठीक करो फिर आएंगे. जिसके बाद ग्रामीणों खुद रास्ते का निर्माण किया. इस मामल ेमें डीडीसी अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन आदिम जनजाति को विकास के लिए प्रतिबद्ध है. हम जल्द ही गांव का निरीक्षण कर गांव में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाएंगे.
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